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हर पल को तो ऑनलाइन कर रहा हूं मैं

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हर पल को तो ऑनलाइन कर रहा हूं मैं खत लिखता था, ईमेल कर रहा हूं मैं रेडियो पर गाने सुनता था कभी यूट्यूब पर लाइव मजे ले रहा हूं मैं किराए के वीसीआर की वो रातें खत्म हुईं टोरेंट से ही मूवी देख ले रहा हूं मैं ऑनलाइन की और क्या कहानी सुनाऊं तुम्हें सुबह का अखबार भी वहीं पढ़ रहा हूं मैं तुम कहती हो प्यार नहीं करता तुमसे देखो कितनों को फेसबुक पर दिल बांट रहा हूं मैं एक तुम्हीं तो थी जो समझती थी मुझे अपने ब्लॉग पर भी ये दु:ख बांट रहा हूं मैं कहती हो, मुझे कुछ महसूस नहीं होता क्या इसके बिना ही जिंदगी ऑनलाइन कर रहा हूं मैं

wah kya rang hain

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जिंदगी में रोज चलते-फिरते  न जाने कितने सूक्ष्म जीवों को हम मसल देते हैं हम कभी घर साफ करने के लिए मकड़ी को बर्बादी देते हैं तो कभी सफाई के नाम पर कीड़े, चीटियों की जिंदगी में कोहराम मचाते हैं उनका दर्द शायद हम सुन नहीं पाते या शायद समझ ही नहीं पाते ये भी तो कुछ ऐसा ही है उस अनजान औलौकिक शक्ति ने शायद घर (पृथ्वी) में नए रंग घोलने की सोची होगी तभी तो उसके ज्वालामुखी रूपी ब्रश ने हमारी जिंदगी में कोहराम मचा दिया है  उम्मीद है वो हमारा दर्द सुन रहा है, समझता भी होगा. 

तो कुछ प्यारा सा लगे

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तेरे हर जुल्म को सोचकर हर सितम को महसूस कर ये फूल कब्र पे बोने की कोशिश है कि शायद तू अगली बार मिले  तो कुछ प्यारा सा लगे

चकल्लस- काला धन, रामदेव, संघ और सरकार

बिंदास- क्यों भाई फोन क्यों नहीं उठाते.  रोडी- अरे क्या उठाएं, वही अपने डॉक्टर साहब हैं.  बिंदास- कौन? रोडी- अरे वो हैं नहीं, पैथॉलॉजी की दुकान भी खोले हैं और ज्ञान भी बहुत पेलते हैं. एक मिनट के लिए बैठो, दुनिया भर का ज्ञान बाल्टी भर-भर के उड़ेलने लगते हैं. अफनाहट होने लगती है, इतने ज्ञान से. उन्हीं का फोन है, उठा लिया तो समझो अपनी शाम हुई.  बिंदास- अरे उठा लो, नहीं तो वैसे भी यहां क्या उखाड़ोगे. कम से कम फोन ही सुन लो, कुछ काम तो करोगे.  रोडी- लेओ तुम्ही पकड़ो, झेलो इन्हें, बहुत खुजली हो रही है न.  बिंदास- अबे खुजली से याद आया, आजकल दुनिया भर को खुजली हो गई है. जिसे देखो भ्रष्टाचार-भ्रष्टाचार खुजला रहा है. रोडी- हाहाहा शुरू हुए तुम.  बिंदास- अबे सुनो तो, पिछले महीने याद नहीं है, अन्ना चाचा कैसी गदर मचाइन था. साला लगा कि इंडिया भी मिस्त्र बन जाएगा. नेहरू की तरह गांधी बने मंच पर ऐसे बैठे थे अन्ना, कि दुनिया साफ करके ही रिलैक्स होएंगे. कांग्रेस ने ऐसा निपटाया कि अन्ना की आंधी कब सुहानी हवा बनी और गुम हो गई, पता ही नहीं च...

चकल्लस- ये वामपंथी हैं ही नहीं!

रोडी- क्यों बिंदास भाई, आजकल खर्चीले नहीं दिख रहे. बिंदास- कौन बे? रोडी- अरे खर्चीले, घर आलीशान, कपड़े फटेहाल, बातों के सिवाए खर्च कुछ ही नहीं करते. बिंदास- हा, हा, हा, अबे वो कहां दिखेंगे. उनके यहां गमी है. अब कई साल तक तेरहीं मनाएंगे. रोडी- क्यों क्या हुआ, उनके तो ले दे के एक ही बेटा था, वो तो अभी कल ही दिखा था. कौन मर गया. बिंदास- पता नहीं, बंगाल में उनके जैसे कइयों की मौत हो गई है. गमी मना रहे हैं. रोडी- अच्छा, हां भइया जिंदगी भर तो दूसरों की गरियाते फिरते थे. ये गलत, वो गलत, इंडिया गलत, बस वही सही. और तो और मौका पाते ही चीन की तारीफ के पुल बांधने से नहीं चूकते थे. मानो, हू जिंताओ, उन्हीं के फूफा रहे. साला, जिंदगी बीत गई, इस आदमी को कभी खुश नहीं देखा, बस दुनिया को गरियाता ही रहता है. आम आदमी की बात करता फिरता और घर में एसी लगवाइस है. और तो और कपड़े ऐसे पहनता कि लगे पंखा खरीदने लायक न हो. बिंदास- तुम भी बहुत ज्ञान पेलते हो. साले एसी कहां देख लिया उसके यहां. घर तो किसी को बुलाता नहीं. रोडी- अमां, सामने से नहीं दिखेगा, राजू मिस्त्री नहीं है, एक दिन घर आया था टेब...

चकल्लस- स्पीक ‘इंडिया’ सनसनी

रोडी- भाई को नमस्कार, कैसे हैं. काफी दिन हुए मुलाकात हुई. बिंदास- हां, भई रोडी. कैसे हो. आओ बैठो. और सुनाओ. रोडी- क्या सुनाएं आजकल तो गुरू स्पीक एशिया करोड़पति बनवा रहा है. बिंदास- हां, सुना तो है. पैसा ही पैसा दे रहा है. रोडी- लेकिन पिछले दिनों स्टारटीवी वालों ने जो शुरू किया, उससे लोगों का कांफिडेंस थोड़ा डगमगा सा गया है. अपने भी 22000 लगे हैं. डर लगता है कहीं डूब गए तो. बिंदास- अच्छा मान लो डूब गए तो क्या करोगे. रोडी- कुछ नहीं, फिर वही घिसी-पिटी जिंदगी शुरू हो जाएगी और क्या. बिंदास- तब काहे परेशान होते हो यार. रोडी- परेशानी ये है कि यार भागे न तो पैसा खूब कमा लेंगे. बिंदास- देखो भाई तुम इतने दिन से जुड़े थे, तुम्हें जो कमाई हो रही थी वह सही थी कि नहीं. रोडी- सही थी, बिलकुल सही थी. बिंदास- तो अब पत्रकारों की कमिश्नरी में काहे फंस के चिंता लिए हो. अबे स्टार न्यूज वाले भी तो एक सर्वे कंपनी चला रहे हैं. कहते हैं हम पैसा नहीं लेते. अबे ठीक है तुम पैसा नहीं लेते, पर एक ऐसा आदमी भी तो पेश कर दो, जिसे तुमने पैसा दिया हो. साले ये स्पीकएशिया ...

चकल्लस- धत तेरी मल्टीटास्किंग की...

बिंदास- क्या हाल है मियां, काफी दिनों बाद मेरे कूचे में तुम पहुंचे. रोडी- अरे, कुछ न कहो भाई, जहां काम करता हूं. वहां नया मैनेजर आया है. कमबख्त ने ऐसा नया शब्द इजाद किया है कि न कुछ बोलते बन रह है, न कराहते. सुबह से रात तक काम-काम और सिर्फ काम. बिंदास- ऐसा कौन सा फाड़ू शब्द है भाई, हमें भी तो बताइए. रोडी- अमां, वो क्या कहते हैं...टाकिंग, टास्स हां....मल्टीटास्किंग. बिंदास- अच्छा, तो ये 'मल्टीटास्किंग पिस्सू' तुम्हारे यहां भी पहुंच गया. अब तो समझो तुम प्लेग से मरोगे. जो काम तुम्हारा नहीं है, वो भी करना होगा, वो भी जोश के साथ, अगर वो नहीं कर पाए तो जिस काम की तनख्वाह पाते हो, वो पूरा करने के बाद भी तनख्वाह नहीं मिलने वाली. रोडी- हां, यार. कम्बख्त डेली, सुबह से शाम तक सिर्फ बेवकूफी भरा ज्ञान बांटता फिरता है. 8 घंटे की नौकरी कहने को है, सुबह 10 बजे से रात 12 यूं बजा देता है, ऊपर से चार बार मीटिंग करता है. और  तो और राय जानने के लिए मीटिंग बुलाता है, और राय दे दो तो ऐसे जलील करता है, जैसे गुनाह कर दिया हो. समझ में ही नही आता क्या करें. बड़ी टेंशन है भाई. बिंदास- चाय प...