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wild-wild

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दुनिया का सबसे वफादार जीव कौन? कुत्ता 20 साल पालें फिर भी पलट के खा ले कौन? शेर इंसान क्या बनना चाहता है? शेर फिर भी कहता है मैं गद्दारी नहीं कर सकता....हाहाहा --------------------------------------------- हे भगवान! तूने मुझे शेर क्यों बना दिया दूसरों की जिंदगी तबाह करके ही मैं सत्ता हासिल कर सकता हूं दूसरों के बच्चे नहीं खाऊंगा तो अपने कैसे होंगे ये कौन सी सजा दे दी तूने अरे, मुझे भी इंसान बना देता, कम से कम मैं अपनी मर्जी से तबाही फैला पाता  जिसने उनके साथियों को चुन-चुन कर मारा परिजनों को काट-काट के खाया उनकी जिंदगी तबाह कर डाली उसी इंसान के चक्कर काट रही हैं ये मछलियां क्या कोई है ऐसा इंसान जो इतना 'बेवकूफ' हो सकता है पूरा समुद्र है अपना जमकर खेलो, जी भर कर खेलो  तू क्या मुंह बाए देख रहा है, इंसान तुझे भी तो दुनिया मिली है खेलने के लिए  तू ही दीवारों में फंसा है तो मैं क्या करूं क्या कुश्ती सिर्फ इंसानों को ही लड़नी आती है  यहां देखो ओपन फॉरेस्ट स्टेडियम में  दो पहलवान भालू लड़ रहे हैं, रेफरी भी है

population

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ये भीड़ आज की नहीं है सदियों से ये जीव यहां जुटते आ रहे हैं मौसम बदलेगा, रुखसती हो जाएगी मगर मजाल है कि इस तट को कोई फर्क पड़े ये जैसा था, वैसा ही बना रहेगा पर मेरा दावा है, एक इंसान यहां छोड़ दो और अगले साल इस तट में सदियों सा बदलाव देख लो जिस हीरे को तू प्यार की सौगात मानता है जिस हीरे को तू सफलता की निशानी मानता है वही हीरा जाने कितनों की मौत का कारण बन चुका है नहीं है यकीन तो जरा इस हीरे की खान को गौर से देखें सोचो, बर्फ की इस तैरती चट्टान पर बैठीं  इन पेंग्विन्स का दिमाग इंसानी हो जाए वादा है, थोड़े समय में बर्फ गायब हो जाएगी और पेंग्विन बोटहाउस में रहने लगेंगीं समुद्र इतना गंदा होगा, कि देखते ही बदबू आएगी पीछे दिख रही पहाड़ी में शॉपिंग काम्प्लेक्स की लाइटें चमक रही होंगीं यहां नेचर के अलावा सब कुछ दिखेगा

going wild

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इस सर्द समंदर में डूबने से अच्छा है चलो शिकार की लाश की कश्ती बना ली जाए वो शिकार भी करते हैं तो साथ मिलकर हम चाय भी पीते हैं अकेले-अकेले वो भूखे होते हैं तो ही हमला करते हैं हम सुकून में बैठे-बैठे हमले पर हमले करते रहते हैं उस 'जहां' की तलाश में हूं जहां से 'जहां' खत्म होता हो मुझे भी देखना है कि  खुद को खत्म होते देख 'जहां' कैसा महसूस करता है जिस ऊंचाई पर पहुंचने के लिए  हमें इतनी मेहनत करनी पड़ी ये परिंदा वहां झट से पहुंच जाता है हमारे पास पैर हैं तो उसके पास पर  सच है हर जीव की अपनी सीमा है पर इंसान को छोड़ हर जीव अपनी सीमा पहचानता है

ankh dokha hai kya bharosa hai

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जो दिखता है वो होता नहीं जो होता है वह दिखता नहीं भरोसा जिंदगी का फलसफा नहीं यहां तो धोखा ही सिर्फ सांस लेता है   मेरी कब्र पर बरसा के पानी क्या जता रहे हैं आप (खुदा) क्या ये मेरी प्यासी जिंदगी को गीला करने की कोशिश है इस रेगिस्तान में भी टायर के निशान हैं मैं कहां जाऊं कि कम्बख्त इंसान न मिले शायद इंसान यहा खुदा से यही कह रहा है- बड़ी कोशिश की तुम्हारी (खुदा) टक्कर लेने की मैंने हर बार सूक्ष्म साबित कर देते हो क्यों ऐसा करते हो, हारने वाले को क्या जीत का एक पल भी नहीं दोगे हर पल जो साथ निभाती है पैरों के निशान पर चलती चली जाती है वो बीवी ही तो है प्रेमिका में कहां मिल पाती है जरा सी धूप, एक बंदर, ढेर सारे पेड़ मैंनेजमेंट इसी को तो कहते हैं सबको उसके लायक हक दे दो बस शानदार प्रेजेंटेशन तैयार पता नहीं ये लड़ रहे हैं या प्रेम कर रहे हैं दोनों शरारत में मशगूल हैं या ये उनकी बातचीत का तरीका है सिर्फ एक पल न जाने कितनी सोच बयां कर रहा है और हम सोचते है कि सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं इक आग उबलती है जमीं के अंदर इक ...