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बिना हथियार के संभाले हैं कमान, जय जवान!

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http://www.thehindu.com/opinion/op-ed/fighting-without-equipment/article7306306.ece म्‍यांमार में ऑपरेशन की खबरें आने के साथ ही एक तस्‍वीर एजेंसी से जारी हुई थी, जिसे देखते ही दिल बाग-बाग हो उठा था। बोला- ये हैं हमारे व़ीर जवान। मैंने झट से फेसबुक पर इनकी हैलीकॉप्‍टर के साथ की तस्‍वीर कवर फोटो के रूप में चस्‍पा कर ली। इस दौरान मेरी नजर इन जवानों के हाथों में सजे असलहों पर पड़ी। मैंने देखा, अरे क्‍या बात है, किसी अमेरिकी सैनिक की तरह हमारे जवान भी अत्‍याधुनिक हथियारों से लैस हैं। वाह। शाबाश इंडिया। लेकिज द हिंदू की वेबसाइट पर एक आर्टिकल ने आंखों पर पड़े इस परदे को नोंचकर फेंक दिया और धीरे-धीरे उदासीनता मेरे जेहन में धंसती चली गई। पता चला कि हमारे जवान आज भी दशकों पुरानी इंसास और स्‍नाइफर राइफल लेकर आतंकियों की एके-47 से मुकाबला कर रहे हैं। कई साल की कोशिश के बाद भी हमारी सेना के अफसर हथियार खरीद ही नहीं पा रहे। वाकई दुखद है ये। आप भी पढ़िए इस आर्टिकल के अनुवाद को, जिसे रक्षा विशेषज्ञ राहुल बेदी ने लिखा है- आतंकवाद विरोधी अभियानों में सेना की कुशलता पर आधुनिक छोटे हथियारों की...

विवेकानंद ने कभी नहीं कहा, अमेरिका के बहनों और भाइयों

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(स्‍क्रॉल डॉट कॉम पर द सिनिक के नाम से प्रकाशित लेख का हिन्‍दी अनुवाद) http://www.dailyo.in/opinion/vivekananda-never-said-sisters-and-brothers-of-america-obama-siri-fort-speech-chicago-a-chorus-of-faith/story/1/1711.html अमेरिका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में जहां खड़े थे, वहां टीवी कैमरे उनके एक-एक शब्‍द और इशारे को रिकॉर्ड कर रहे थे। ओबामा ने यहां स्‍वामी विवेकानंद के उस भाषण को उद्धृत किया जो उन्‍होंने उनके गृह जनपद शिकागो में 121 साल पहले हुई धर्म संसद के दौरान दिया था। ओबामा ने कहा कि विवेकानंद ने अपने भाषण की शुरुआत इन शब्‍दों से की थी- अमेरिका के बहनों और भाइयों। कहा जाता है कि अगर कोई बात अनगिनत बार बोली जाए तो वह धीरे-धीरे सच का रूप ले लेती है। शायद अमेरिका के बहनों और भाइयों वाली बात के साथ भी यही हुआ, जिसे ओबामा भी सच मान बैठे। दशकों पहले या कहें करीब-करीब शताब्‍दी पहले 10 से 27 सितम्‍बर के बीच 1893 में शिकागो में एक किताब प्रकाशित हुई थी। उस किताब का शीर्षक था, अ कोरस ऑफ फेथ एस हर्ड इन द पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन्‍स । ये वही शिकागो में ...

‘याद रखना हम न तो भूलते हैं न ही माफ करते हैं.’

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- पेशावर आतंक के बाद करुणा में डूबे एक देश को याद दिलाने की कोशिश अजयेंद्र राजन कुछ समय पहले मैंने एक मूवी देखी थी, नाम था म्यूनिख. ये फिल्म उस देश की इच्छाशक्ति और कभी हार नहीं मानने के उन कदमों को रेखांकित करती है, जिसमें वह आतंकियों के घर फूल भेजता है और लिखकर देता है, ‘याद रखना न हम भूलते हैं न ही माफ करते हैं.’  ये उस देश की कहानी थी, जिसने आतंकवाद का दंश हमारी तरह ही झेला और आज भी झेल रहा है लेकिन वह भावनाएं किनारे रखकर पूरी रणनीति और सजगता के साथ इसका मुकाबला कर रहा है. इजरायल. जी हां, चलिए आपको बताते हैं कि आतंकवाद से लड़ने की रणनीति और इच्छाशक्ति कहते किसे हैं, फिल्म के बाद विकीपीडिया से काफी तथ्य मिले, जिन्हें आपसे शेयर कर रहा हूं. 1972 के म्यूनिख ओलिंपिक्स में फिलिस्तीन के आतंकवादी संगठन ब्लैक सेप्टेंबर और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) के ग्रुप ने इजरायल की ओलिंपिक टीम के 11 सदस्यों को मौत के घाट उतार दिया. इसके जवाब में इजरायल ने मोसाद के निर्देशन में एक गुप्त ऑपरेशन शुरू किया, जिसे हम रैथ ऑफ गॉड (ईश्वर का कहर) या ऑपरेशन बायोनेट (ऑपरेशन कोप) भी कहते हैं...

कहीं न कहीं तानाशाही रवैये की बू आती है!

पुच्‍चू- और भाई क्‍या हाल है, आज बड़ा गमगीन से लग रहे, सब ठीक तो है। चुन्‍नू- नहीं भाई सब ठीक है, बस एक खबर में परेशान कर दिया है, बिहार के समस्‍तीपुर में एक युवक की आपसी रंजिश में कुछ लोगों ने जानवरों जैसा बर्ताव करते हुए उसे चाकुओं से गोद डाला, यही नहीं उसके चेहरे का मांस उतार लिया और दोनों आंखें फोड़ डालीं। ये क्‍या है, यार खबर पढ़कर दिल तड़प सा गया। पुच्‍चू- जाने दो यार, ये हमारे समाज की ऐसी बुराई है जिसे दूर करना असंभव है, हम इंसान कब जानवर बन जाएं कुछ पता है क्‍या। चुन्‍नू- उन लोगों ने ये भी नहीं सोचा कि उस युवक से जुड़ा हर सदस्‍य आज प्रतिशोध की भावना में जी रहा होगा, उसकी तो जिंदगी बर्बाद हो ही गई। हम पुलिस को दोष जरूर दे देंगे लेकिन सच ये है कि हम जानवर ही हैं। कोई सरकार या कोई पुलिस इसे नहीं रोक सकती। कभी-कभी तो लगता है कि तानाशाही देश में आ जाए तो ही बेहतर। पुच्‍चू- वो तो आती दिख रही है भाई। चुन्‍नू- अमां, कहां आ रही है। पुच्‍चू- बोलने से पहले मैं ये जरूर बता दूं कि मैं किसी भी दल विशेष से संबंध नहीं रखता, नहीं तो खाली-पीली तुम मुझ पर पिल पड़ोगे। पुच्‍चू- मैं दरअसल बात ...