खुद से चलकर नहीं ये तर्ज-ए-सुखन आया है











पाँव दाबे हैं उस्तादों के तो ये फन आया है





Comments

M.Mubin said…
खुशी हुई जय आपके कहानियों के बारे में विचार जानकर वरना नई पीढी को इस विधा में कोई रुचि नहीं है
RAJNISH PARIHAR said…
ब्लॉग परिवार में आपका स्वागत है!लिखने के साथ साथ पढ़ते रहिये!!होली की शुभकामनायें...
ब्लागवुड मे आपका स्वागत है । "आपको भी होली की शुभकामनाएँ
आप और आपके परिवार को होली की शुभकामनाएँ...nice